सदियों पहले मुद्दतें गुज़री ज़ेहन में बसी पल पल चुभी याद थी तेरी कड़वी ही सही सदियों पहले मुद्दतें गुज़री ज़ेहन में बसी पल पल चुभी याद थी तेरी कड़वी ही सही
गरीबी,अज्ञानता के कारण, जीवन को बोझ समझ दब जाते हैं, आगे चलकर देश की प्रगति में, प्र गरीबी,अज्ञानता के कारण, जीवन को बोझ समझ दब जाते हैं, आगे चलकर देश की प्रगत...
जिंदगी बीत जायेगी यही सोचते कि लोग क्या कहेंगे, उनका क्या, माँस है सबका नोचते कि और जिंदगी बीत जायेगी यही सोचते कि लोग क्या कहेंगे, उनका क्या, माँस है सबका नो...
गुलामी की बेड़ियाे तोड़कर स्वतन्त्रता की इबारत लिखेंगे हम। गुलामी की बेड़ियाे तोड़कर स्वतन्त्रता की इबारत लिखेंगे हम।
नया साल आया है, खुशियों का भंडार लाया है। नया साल आया है, खुशियों का भंडार लाया है।
क्या उसको कभी मेरी अब याद नहीं आती। क्या उसको कभी मेरी अब याद नहीं आती।